कोल्हान में राम मंदिर के लिए चार करोड़ से ज्यादा मिला चंदा, लक्ष्य पूरा, समर्पण अभियान भाजपा के लिए बना संजीवनी

11-11 लाख भी व्यक्तिगत चंदा देनेवाले मिले शहर में, घर-घर पहुंचा भगवा परिवार

संघ की व्यूह रचना से विहिप ने पार की लक्ष्य की वैतरणी, संगठन को मिली नई धार

भाजपाइयों में हुआ उत्साह का संचार, टूटी चुनावी निराशा, प्रचार का मौका

जमशेदपुर : अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण राशि (चंदा) संग्रह अभियान ने कोल्हान में भगवा परिवार के लिए संजीवनी का काम किया है. पिछले झारखंड विधानसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित व करारी शिकस्त के बाद परिवार में निराशा का जो भाव पैदा हुआ था वह अब उम्मीदों में तब्दील हो गया है.

राम मंदिर निर्माण के लिए कोल्हान से चार करोड़ का लक्ष्य था जिसे पूरा कर लिया गया है. इलाके में कई ऐसे लोग मिले जिन्होंने 11 -11 लाख तक की राशि व्यक्तिगत रूप से दी.

भगवा परिवार के तमाम घटकों के बीच संवाद भी बढ़ा, समन्वय भी स्थापित हुआ और सामंजस्य के साथ आगे बढऩे की स्थिति भी बनी. इसीलिए समर्पण राशि संग्रह अभियान को परिवार ने हर दृष्टिकोण से मुफीद माना जा रहा है.

राम मंदिर के लिए कोष संग्रह

44 दिन तक चला अभियान

राम मंदिर के लिए समर्पण राशि एकत्र करने का दायित्व विश्व हिंदू परिषद के कंधे पर था. 15 जनवरी से 27 फरवरी तक चले इस अभियान के लिए विहिप ने जमशेदपुर महानगर समेत पूरे कोल्हान में अपनी ताकत झोंकी थी. इस अभियान ने विहिप को अपनी शक्ति का भी अहसास करा दिया.

बीच में आना पड़ा संघ को बनवाया समन्वय

बेशक निर्धारित लक्ष्य को पार हासिल कर लिया गया है लेकिन इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी बीच में आना पड़ा. जानकारों का कहना है कि 44 दिन तक चले इस अभियान के बीच में जब कार्य की समीक्षा की गई तब महसूस किया गया कि अपने बूते विहिप के लिए राशि संग्रह की बैतरणी पार करना मुश्किल है.

मोटे तौर पर कारणों की पड़ताल की गई. ऐसा प्रतीत हुआ कि विहिप का संगठन उतना मजबूत नहीं है कि अपने बूते क्षेत्र के हर घर से संपर्क कर लिया जाए. समीक्षा में यह बात भी सामने आई कि समर्पण राशि देने वालों की इच्छा या शक्ति का सही आंकलन नहीं हो पा रहा और जितनी राशि वे देने की स्थिति में रहते हैं उससे बहुत कम राशि लेकर रसीद पकड़ा दी जा रही है. मसलन यदि कोई सामर्थवान लाख रुपये देने की स्थिति में है तो उनसे 25-50 हजार निकलवाकर भी संतोष कर लिया गया. इस प्रवृत्ति को लक्ष्य हासिल करने की दिशा में बड़ी चुनौती माना गया.

इसके बाद संघ सक्रिय हुआ. अपने स्तर से बैठक कराई. समन्वय बनवाया और सामर्थवान लोगों से अधिकतम समर्पण राशि निकलवाने की पहल की गई. इस मोर्चे पर वैसे स्वयंसेवकों को लगया गया जो हर किसी को न सिर्फ राम मंदिर निर्माण से भावनात्मक रूप से जोडऩे की शक्ति रखते थे बल्कि वे ज्यादा से ज्यादा समर्पण राशि भी निकलवाने की तरीका जानते थे.

तुलसी भवन में बैठक कर बनी रणनीति

फरवरी के तीसरे सप्ताह से संघ की यह रणनीति परवान चढऩे लगी. तुलसी भवन में एक बैछक हुई. बड़ी बैठक में मंधन हुआ. स्वयंसेवक गलियों में निकल गये. भाजपा नेताओं को सक्रिय होने का संदेश मिल गया. भाजपाईयों को प्रचार का अवसर भी दिख गया और इस तरह एकायक समर्पण राशि अभियान में सकारात्मक बदलाव देखा गया. तेजी तो आई ही.

गली-गली में घुसे स्वयंसेवक. कटने लगी रसीद

गली-मुहल्लों में घर-घर घूमकर दस रुपये से लेकर 100 और हजार की रसीद काट आम लोगों को जोड़ा गया. तो धन्ना सेठों से भी संपर्क कर अपने रामजी के लिए मुट्ठी खोलने की गुजारिश की गई.

चंदा संग्रह
मंदिर के लिए संग्रह

भाजपा नेताओं की भी बढ़ी सक्रियता

भाजपा नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से समर्पण राशि देने की घोषणा शुरू कर दी. दनादन चेक काटकर उसके साथ फोटो खींचवाने, दिखाने और मीडिया में उसे चमकाने की एक तरह से होड़ बढ़ गई. भाजपा शासन के दौरान सत्ता के शीर्ष पर रहे लोगों से लेकर संगठन में सक्रिय नेताओं तक में यह होड़ चंदा अभियान के लिए बड़े काम की साबित हुई. इससे कुल राशि हर दिन बढ़ती चली गई और साथ ही साथ चंदा देने की देखा-देखी भी तेज हुई. किसी ने देखा कि अमुक व्यक्ति ने इतनी राशि दी तो वह उससे ज्यादा का चेक काटकर खुद को गौरवान्वित महसूस किया. कई लोगों ने इसे सार्वजनिक भी किया.


समर्पण राशि अभियान में दिखा कई रंग

समर्पण राशि अभियान में कई रंग दिखे. जमशेदपुर महानगर में अभी तक विहिप के स्तर से आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं कि किन-किन लोगों ने कितनी-कितनी राशि दी. लेकिन जानकार सूत्र बताते हैं कि भाजपा से जुड़ाव रखने वाले एक होटल कारोबारी ने व्यक्तिगत स्तर से 11 लाख रुपये का दान देकर बड़ी पहल की.

हालांकि कुछ धन्ना सेठ ऐसे भी रहे जिन्होंने इससे भी ज्यादा राशि दी लेकिन यह निवेदन करते हुए कि नाम सार्वजनिक करने और रसीद के साथ फोटो खींचवाने से यह कहते हुए मना कर दिया कि जब उनकी समर्पण राशि के बारे में आम लोगों को पता चल जायेगा तो बाद में किसी भी प्रकार का चंदा वसूलने वाले लोग हमेशा उनके साथ परेशानी खड़ा करते रहेंगे. उनका यह निवेदन हर किसी को सही लगा इसीलिए नाम को सार्वजनिक करने से परहेज किया गया. आदित्यपुर इलाके में स्थित एक बड़ी कंपनी के मालिक ने कोलकाता में भाजपा के एक बड़े नेता के समत्क्ष अपनी दान पेटी खोली. उन्होंने बहुत बड़ी राशि दान दी है. भाजपाई उन जालान साहब की दानशीलता की खूब चर्चा कर रहे हैं.

प्रतिस्पर्धा ने भी बढ़ाई चंदे की राशि

उधर, चंदा देने को लेकर कई लोगों या परिवारों में प्रतिस्पद्र्धा भी नजर आई. रिश्ते में चचेरे भाई और एक से ज्यादा राजनीतिक दलों में सक्रिय रहकर सियासी अनुभव प्राप्त करने वाले दो नेताओं की प्रतिस्पद्र्धा विहिप के लिए बहुत फायदेमंद रही. एक भाई ने पहले एक लाख एक हजार देने का ऐलान किया. चचेरे भाई ने एक लाख 51 हजार की घोषणा कर दी. फिर क्या था पहले वाले ने दोबारा परिवार की तरफ से चंदा देने का ऐलान किया और रकम बढ़ा कर दी 2 लाख 51 हजार रुपये.

इस तरह के कई उदाहरण सामने आए. कई मोहल्लों में तो ऐसा भी हुआ कि जब लोग पूछते थे कि फलना आदमी ने कितना दिया क्योंकि उनसे ज्यादा देना है. इस तरह समर्पण राशि अभियान कई रंग और कई स्थितियों को अपने में समेटते हुए मुकाम तक पहुंचा. उसके लिए सुखद बाद यह रही कि उम्मीद से ज्यादा समर्थन मिला. लक्ष्य तो हासिल हुआ ही. आम जनता का जो उत्साह दिखा और भाजपा नेताओं की जैसी सक्रियता सामने आई उससे यह बात भी सामने आई कि विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त को अब भूलकर भाजपाई फिर से मैदान मारने के लिए हौसला जुटा चुके हैं. राम मंदिर का चंदा अभियान उनके लिए बड़ा अवसर बनकर आया है.

रसीद के साथ मीडिया में छाई उनकी तस्वीरें इंगित कर रहीं कि सार्वजनिक जीवन में वे पूरे दमखम के साथ डटे हैं और नजरे लक्ष्य पर हैं.

Leave a Reply