टीकाकरण के दूसरे चरण पर सबकी नज़र

टीकाकरण का दूसरा चरण काफ़ी महत्वपूर्ण साबित होगा. जैसा कि विशेषज्ञों द्वारा रेखांकित किया जा चुका है, टीकाकरण के दूसरे चरण से न केवल देश में मामलों की संख्या और देश के विभिन्न हिस्सों में सुपर-फैलने की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे म्यूटेशन की संभावना को कम करने में भी मदद मिलेगी.

वायरस में म्यूटेशन एक सामान्य और प्राकृतिक घटना है जिसके बारे में वैज्ञानिकों को पता है. दुनिया के विभिन्न हिस्सों से नये म्यूटेशन की सूचना मिली है. इस वायरस में भी तेज़ी से म्यूटेशन के संकेत मिले हैं.

देश में मामलों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ जहाँ-तहाँ सुपर-स्प्रेड होने के प्रमाण दरअसल इस ज़रूरत को रेखांकित करते हैं कि टीकाकरण प्रक्रिया को जितनी जल्दी हो सके पूरा करना आवश्यक है.

सरकार ने अब फैसला किया है कि 60 से ज़्यादा की उम्र वाले और को-मॉर्बिडिटी वाले 45 से ऊपर के सभी लोगों को 1 मार्च से टीका लगाया जाएगा. मृत्यु दर को और कम करना तथा नये मामलों की संख्या में कमी लाना महत्वपूर्ण है.

जितने ज़्यादा लोग संक्रमित होंगे, वाइरस में म्यूटेशन की आशंका भी उतनी ही ज़्यादा होगी. वायरस से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका संक्रमण की संभावना को कम करना और साथ ही साथ अधिकतम लोगों की कम्यूनिटी या प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है.

टीकाकरण अभियान लगातार चल रहा है। लेकिन, देश में उत्पादन के साथ-साथ टीकाकरण की प्रक्रिया में भी तेजी लाने का वक़्त आ गया है.

हमने इस वाइरस की वजह से काफ़ी नुक़सान सहा है. यह ज़रूरी है कि हम इस लड़ाई को जीतें.

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