टाटा वर्कर्स यूनियन के सामने निबंधन रद्द होने का मंडराया खतरा

चुनाव कराने में हड़बड़ी के दौरान गड़बड़ी की शिकायतों के बाद श्रम विभाग ने भेजा नोटिस

5 दिन पहले ही संजीव चौधरी की अगुवाई में नई टीम ने संभाला था कामकाज

जमशेदपुर: देश में क्षेत्र की सबसे बड़ी और धनी यूनियनों में शुमार टाटा स्टील की मान्यता प्राप्त श्रमिक यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन के निबंधन पर खतरा मंडराने लगा है।

ऐसी स्थिति यूनियन चुनाव में हड़बड़ी कर गड़बड़ी करने के आरोपों से कारण हुई है।

इस यूनियन का चुनाव गत 31 जनवरी को हुआ था और 1 फरवरी को दोपहर तक सभी नतीजे आ गए थे. यूनियन की नई टीम ने 11 फरवरी को अध्यक्ष संजीव चौधरी के नेतृत्व में औपचारिक रूप से जीत का प्रमाण पत्र मिलने के बाद काम का संभाला था।

अभी यूनियन के तमाम पदाधिकारी और कमेटी मेंबर जिस जीत का जश्न मनाने और स्वागत अभिनंदन कराने में व्यस्त हैं।

इसी बीच यूनियन के सक्रिय सदस्यों अनिल सिंह व सुनील सिंह की शिकायत पर जमशेदपुर के उप श्रम आयुक्त कार्यालय ने यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी उर्फ सोनू चौधरी को नोटिस भेजकर चुनाव से संबंधित आपत्तियों पर मार्च के पहले सप्ताह तक जवाब मांगा है अनिल सिंह और सुनील सिंह ने श्रम आयुक्त से शिकायत कर रखी है यूनियन का चुनाव हड़बड़ी में ठीक कराया गया और इस दौरान कई तरह की अनियमितताएं बरती गई।

नियम व मान्य परंपरा को दरकिनार कर चुनाव के सारे कार्य किए गए। चुनाव समिति के चयन से लेकर पूरी चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने में बहुत जल्दबाजी की गई।

इससे सदस्यों को अपने कमेटी मेंबरों को चुनने या चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए मन बनाने या विचार विमर्श करने का पर्याप्त समय ही नहीं मिला।

सब कुछ हड़बड़ी में निपटा कर नियमों की अवहेलना की गई और मनमाने तरीके से चुनाव प्रक्रिया अपनाकर सदस्यों के अधिकारों को नजरअंदाज किया गया है। जमशेदपुर के उप श्रम आयुक्त राजेश प्रसाद ने कहा है कि चुनाव में अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद टाटा वर्कर्स यूनियन को नोटिस भेजकर मार्च के पहले सप्ताह तक जवाब मांगा गया है।

2005 में भी ऐसी आई थी ऐसी स्थिति

2005 में भी टाटा वर्कर्स यूनियन में कुछ ऐसी ही स्थिति आई थी। उस समय अध्यक्ष थे आरबीबी सिंह।

उन्होंने भी चुनाव कराने में बहुत जल्दबाजी की और तमाम आपत्तियों को दरकिनार कर दिया। तब इन आपत्तियों को लेकर श्रम विभाग ने कड़ी कार्रवाई की थी। रघुनाथ पांडे व उनकी टीम से मिली शिकायतों की जांच के उपरांत श्रम विभाग ने ऐतिहासिक कार्रवाई कर यूनियन का चुनाव अवैध घोषित कर दिया था और उसके निबंधन को भी रद्द कर दिया था। बाद में दोबारा चुनाव हुआ तब माहौल बदल गया। रघुनाथ पांडे की टीम जीत कर आ गई। टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव में इस बार भी 2005 की तरह शिकायतें की गई हैं और इस बात की भी आशंका बलवती हो जा रही है कि कहीं फिर यूनियन का निबंधन रद्द ना हो जाए।

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