आंगनबाड़ी सेविकाओं ने प्रधानमंत्री के नाम का माँग पत्र सौंपा

जमशेदपुर: शहर में आंगनबाड़ी सेविकाओं व सहियाओं के एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय पहुंची, जहां उन्होंने जिले के उपायुक्त के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री के नाम एक मांग पत्र सौंपा।

ञात हो कि पूर्व रघुवर सरकार में झारखंड की आंगनबाड़ी सेविका और सहियाएं वेतन विसंगति, पीएफ, ग्रेजुएटी, मेडिकल, अवकाश और नियमितीकरण जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर चुकी है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है।

वैसे वर्तमान सरकार ने चुनावी सभाओं में आंगनबाड़ी सेविकाओं की समस्या का समाधान करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन कोविड के एक साल बीत जाने के बाद आंगनबाड़ी सेविका और सहिया पुरानी मांगों पर सरकार से विचार करने की मांग की। सोमवार को उपायुक्त कार्यालय के समक्ष जानकारी देते हुए बिंदु देवी ने बताये आंगनबाड़ी सेविकाओं की मांग को लेकर सरकार के ध्यान आकृष्ट कराने के लिए उपायुक्त के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। सौंपे गए मांग पत्र के आधार पर इन्होंने खुद को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का सबसे सशक्त माध्यम बताया।

उन्होंने कहा आंगनबाड़ी सेविकाओं के द्वारा ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है, लेकिन आज तक आंगनबाड़ी सेविकाएं व सहियायें अपने हक,अधिकार से वंचित है। इन्होंने प्रधानमंत्री के नाम 5 सूत्री मांग पत्र जिले के उपायुक्त के माध्यम से सौंपा है। इसके माध्यम से इन्होंने आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहियाओ को सरकारी कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग की। साथ ही सेविकाओं का वेतन 18000 और सहियाओं का वेतन 9000 किए जाने की मांग की। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिक विद्यालय का दर्जा देते हुए वहां काम कर रहे सेविकाओं को पूर्व प्राइमरी टीचर और सेविकाओं को पूर्व प्राइमरी सह टीचर की मान्यता दिए जाने की मांग की।

इन्होंने आंगनबाड़ी कर्मचारियों के लिए पीएफ, ग्रेजुएटी, अवकाश और मेडिकल की सुविधा बहाल किए जाने की भी मांग की है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के तर्ज पर सीएल, ईएल, मेडिकल, अवकाश और अन्य पर्व त्योहारों पर मिलने वाले अवकाश का लाभ भी दिए जाने की मांग की।

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